3 में से 2
शहरी माता-पिता कहते हैं कि उनका बच्चा (9–17 साल) सोशल मीडिया, वीडियो या ऑनलाइन गेमिंग का आदी है।
LocalCircles सर्वे, दिसं. 2025 · The Week / PTI
रिसर्च एक नज़र में
माता-पिता इसे रोज़ शाम घर में महसूस करते हैं, और अब सर्वे और रिसर्च भी यही दिखा रहे हैं। यहाँ बच्चों के फ़ोन इस्तेमाल पर भारत के सबसे ताज़ा आँकड़े हैं, हर आँकड़े के साथ उसकी ख़बर का लिंक।
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3 में से 2
शहरी माता-पिता कहते हैं कि उनका बच्चा (9–17 साल) सोशल मीडिया, वीडियो या ऑनलाइन गेमिंग का आदी है।
LocalCircles सर्वे, दिसं. 2025 · The Week / PTI
2.2 घंटे
रोज़ का औसत स्क्रीन टाइम है भारत में 5 साल से छोटे बच्चों का, यानी सुझाई गई सीमा का लगभग दोगुना।
AIIMS रायपुर समीक्षा, जुलाई 2025 · WION
3.5 घंटे
रोज़ स्मार्टफ़ोन पर बिताते हैं 8 बड़े शहरों के 10–16 साल के बच्चे। उनके माता-पिता: 4.4 घंटे।
vivo Switch Off स्टडी, दिसं. 2025 · The Week / PTI
76%
ग्रामीण भारत के 14–16 साल के बच्चे स्मार्टफ़ोन चलाते हैं, और 89% के घर में स्मार्टफ़ोन है।
ASER 2024, फ़र. 2025 · Greater Kashmir
4% → 21%
शहरी बच्चों में मायोपिया (पास की नज़र कमज़ोर) 1999 में 4.44% से बढ़कर 2019 में 21.15% हो गया। डॉक्टर इसे स्क्रीन और घर के अंदर ज़्यादा समय से जोड़ते हैं।
IANS में डॉक्टरों के हवाले से, मई 2024 · DT Next
58%
माता-पिता कहते हैं कि ज़्यादा ऑनलाइन रहने से बच्चा ज़्यादा गुस्सैल हो गया है, और 61% कहते हैं ज़्यादा बेसब्र।
LocalCircles सर्वे, दिसं. 2025 · The Week / PTI
LocalCircles ने नवंबर–दिसंबर 2025 में शहरी भारत के 302 ज़िलों में स्कूली बच्चों के माता-पिता से बच्चों की ऑनलाइन आदतों के बारे में पूछा और 57,000 से ज़्यादा जवाब मिले। हर 3 में से 2 ने कहा कि उनका बच्चा सोशल मीडिया, वीडियो या ऑनलाइन गेमिंग में से कम से कम एक का आदी है। कुछ ने बताया कि बच्चे रोज़ 6 घंटे से ज़्यादा फ़ोन पर रहते हैं।
18,523 माता-पिता से पूछा गया कि ज़्यादा ऑनलाइन रहने से बच्चे का बर्ताव कैसे बदला: 61% ने कहा बेसब्र, 58% ने गुस्सैल, 50% ने ज़रूरत से ज़्यादा चंचल और 47% ने सुस्त। सिर्फ़ 11% ने कहा ज़्यादा ख़ुश। (The Week / PTI, 22 Dec 2025)
AIIMS रायपुर के शोधकर्ताओं ने छोटे बच्चों पर भारत की कई स्टडी को मिलाकर देखा: 5 साल से छोटे बच्चे रोज़ औसतन लगभग 2.2 घंटे स्क्रीन देखते हैं, जो 2 से 5 साल के लिए सुझाई गई 1 घंटे की सीमा का लगभग दोगुना है। 2 साल से छोटे बच्चे लगभग 1.2 घंटे देखते हैं, जबकि डॉक्टर इस उम्र में स्क्रीन बिल्कुल न देने की सलाह देते हैं। (WION, 9 Jul 2025)
Sapien Labs की 1 लाख से ज़्यादा युवाओं पर हुई एक बड़ी ग्लोबल स्टडी में पाया गया कि जिन्हें पहला स्मार्टफ़ोन जितनी कम उम्र में मिला, बड़े होकर उनका मानसिक स्वास्थ्य स्कोर उतना ही ख़राब था। (Greater Kashmir / IANS, 21 Jul 2025)
यह सिर्फ़ बड़े शहरों की बात नहीं। ग्रामीण भारत पर ASER 2024 सर्वे के अनुसार 14–16 साल के 89% बच्चों के घर में स्मार्टफ़ोन है, 76% उसे चलाते हैं, और 31% के पास अपना फ़ोन है। 57% ने उसे पढ़ाई से जुड़े किसी काम के लिए इस्तेमाल किया। (Greater Kashmir, 4 Feb 2025)
शहरों में, फ़ोन कंपनी vivo के लिए CyberMedia Research की स्टडी में 10–16 साल के बच्चे रोज़ 3.5 घंटे फ़ोन पर पाए गए, और उनके माता-पिता 4.4 घंटे। 91% बच्चों ने कहा कि फ़ोन दूर रखने पर बातचीत आसान लगती है। (The Week / PTI, 11 Dec 2025)
आँखों के डॉक्टरों के अनुसार 5–15 साल के शहरी बच्चों में मायोपिया 1999 में 4.44% से बढ़कर 2019 में 21.15% हो गया, और 2050 तक यह लगभग 48% तक पहुँच सकता है। वे इसकी वजह स्क्रीन का इस्तेमाल और बाहर कम समय बिताना बताते हैं। (DT Next / IANS, 14 May 2024)
जनवरी 2026 में सरकार के आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 ने डिजिटल लत को बढ़ती समस्या बताया और लगातार स्क्रॉल करने व गेमिंग को युवाओं में नींद की कमी, गुस्से, अकेलेपन और डिप्रेशन से जोड़ा। इसमें स्कूलों में डिजिटल वेलनेस पाठ्यक्रम और युवाओं के लिए ऑफ़लाइन जगहों का सुझाव दिया गया। Tele-MANAS मानसिक स्वास्थ्य हेल्पलाइन पर अक्टूबर 2022 से 32 लाख से ज़्यादा कॉल आ चुकी हैं। (DT Next / IANS, 29 Jan 2026)
पूरा प्लान पढ़ें: बच्चे की मोबाइल की लत कैसे कम करें (English)।
आँकड़े ऊपर दिए गए ख़बरों के स्रोतों के अनुसार हैं। यह पेज सामान्य जानकारी है, मेडिकल सलाह नहीं।
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